Monday, 9 May 2016

A Tribute to my Late Mother - Gaurav Kapoor

दिया 'बरकत' का जलाए रखती थी
'माँ जब तक थी'
चारदीवारी को घर बनाए रखती थी ..
दिनभर डांटती थी बेशक मुझे लेकिन
'माँ जब तक थी'
वो रातभर सीने से लगाए रखती थी ..
दबा लेती थी वो हर राज़ को दिल में
'माँ जब तक थी'
मेरे हर ऐब पर पर्दा गिराए रखती थी ..
कभी पेट काटकर तो कभी मन मारकर
'माँ जब तक थी'
वो मेरे नाज़ - नखरे उठाए रखती थी ..
मैं लौटूं ना अगर देर रात तक वापस
'माँ जब तक थी'
रस्ते पर अपनी नज़रें गड़ाए रखती थी ..
बहती नदी या ठंडी हवा का झोंका थी
'माँ जब तक थी'
मुझे हर गर्म हवा से बचाए रखती थी ..
तितर बितर हो गए हैं सब के सब पंछी
'माँ जब तक थी'
वो अपना आशियाना सजाए रखती थी ..
और हाय ...! अब बस .....
खाली मकाँ और खोखली दीवारें हैं वहां
'माँ जब तक थी'
वो अपनी खुशबू से
हमारे सारे 'घर' को 'महकाए' रखती थी !! 

By - Gaurav Kapoor

Thursday, 5 May 2016

Pankaj Sain Shayari

उठाओ उँगलियाँ हम पर, फ़कत इतना समझ लीजिये.!
हमारी शकसियत कुछ कुछ सनम आईने जैसी है.!!

#Pankaj Sain

Wednesday, 4 May 2016

हम भी वो शेर लिखेंगे एक दिन।
 आखरी होगा, पर मशहूर बहुत होगा।।

#PankajSain

Pankaj Sain- तेरे ताबूत में कुछ कील जड़ के जाएंगे.

तेरे ताबूत में कुछ कील जड़ के जाएंगे.!
हम तो शायर हैं बस लफ़्ज़ों से लड़ के जाएंगे.!!
ऐ सियासत तू कज़ा तेज कर समशीरों पर.!
हम तो जाते हुए भी शेर पढ़ के जाएंगे.!! 

#Pankaj_Sain

Monday, 2 May 2016

Fir Meri Yaad by Kumar Vishwas


हर एक बात पे कहते हो तुम की तू क्या है - Mirza Galib

हर एक बात पे कहते हो तुम की तू क्या है
तुम्हीं कहो के ये अंदाज़ ऐ गुफ्तगू क्या है?
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल
जब आँख से ही न टपका तोः फिर लहू क्या है?

Gulzar ji ki kalam se