Friday, 29 April 2016

Silsila Movie - कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि ज़िंदगी तेरी जुल्फों की नर्म छांव में गुज़रने पाती तो शादाब हो भी सकती थी....
यह रंज-ओ-ग़म की सियाही जो दिल पे छाई है, तेरी नज़र कि शुआओं में खो भी सकती थी....
मगर ये हो न सका,
मगर यह हो न सका और अब ये आलम है कि तू नहीं, तेरा ग़म, तेरी जुस्तजू भी नहीं।
(गुज़र रही है कुछ इस तरह ज़िंदगी, जैसे इसे किसी के सहारे की आरज़ू भी नहीं.)
न कोई राह, न मंजिल, न रौशनी का सुराग....
भटक रहीं है अंधेरों में ज़िंदगी मेरी. ..
इन्हीं अंधेरों मैं रह जाऊँगा कभी खो कर मैं जानता हूँ मेरी हम-नफस...
मगर यूंही कभी कभी मेरे दिल मैं ख्याल आता है.

Thursday, 28 April 2016

Kumar Vishwas - हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते,


हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते,
मगर रस्मे-वफ़ा ये है कि ये भी कह नहीं सकते !
जरा कुछ देर तुम उन साहिलों कि चीख सुन भर लो,
जो लहरों में तो डूबे हैं मगर संग बह नहीं सकते !

Wednesday, 20 April 2016

Rahat Indori - सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें




सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें

शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें



Suraj, sitaare, chaand mere saath me rahe
jab tak tumhare haath mere haath me rahe

Shaakhon se toot jaaye wo patte nahi hain hum
Aandhi se koi kah de ki aukaat me rahe


#राहत इन्दोरी







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Suraj, sitaare, chaand mere saath me rahe
jab tak tumhare haath mere haath me rahe
Shaakhon se toot jaaye wo patte nahi hain hum
Aandhi se koi kah de ki aukaat me rahe
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सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें
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सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें
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सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें
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सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें
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सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें
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सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें
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Tuesday, 19 April 2016

Shayari From Munawwar Rana

किसी के जख्म पर चाहत से पट्टी कौन बँधेगा
अगर बहनें नही होंगी तो राखी कौन बँधेगा

Sunday, 17 April 2016

कहाँ तक आँख रोएगी कहाँ तक किसका ग़म होगा
मेरे जैसा यहाँ कोई न कोई रोज़ कम होगा
तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना रो चुका हूँ मैं
कि तू मिल भी अगर जाये तो अब मिलने का ग़म होगा
समन्दर की ग़लतफ़हमी से कोई पूछ तो लेता
ज़मीं का हौसला क्या ऐसे तूफ़ानों से कम होगा
मोहब्बत नापने का कोई पैमाना नहीं होता
कहीं तू बढ़ भी सकता है, कहीं तू मुझ से कम होगा

‪#‎Waseem_Barelvi_Sahab‬

कई आए, कई गये.
पर जो ना जा सका वो.... "तुम" हो. 

By - Abhideep Roy